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Sunday, February 2, 2020
February 02, 2020
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आशिक़ था एक मेरे अंदर,
कुछ साल पहले गुज़र गया,
अब कोई शायर सा है,
अज़ीब-अज़ीब सी बातें करता है !!
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bajrang
March 7, 2022 at 10:14 PM
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आशिक़ था एक मेरे अंदर, कुछ साल पहले गुज़र गया, अब कोई शायर सा है, अज़ीब-अज़ीब सी बातें करता है !!
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देखकर काजल की लकीरें उसकी आँखों पर, पहली दफा जाना कि चाँद की खूबसूरती रात से क्यो है।
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